Sunday, June 3, 2012

THE STORY BEHIND YOUNG GENERATION PEOPLE'S SUICIDES AND ITS SOLUTION - Aishwary Dubey


भारत , हमारा भारत उभरता हुआ भारत. हमारा देश उभर तो रहा है , तरक्की भी कर रहा है इसीलिए लोगों की आपसी प्रतियोगिता भी बढ़ गयी है.ज़ाहिर सी बात है की कोई किसी को अपने से आगे नहीं देखना चाहता. ये बात कितनी अच्छी है और कितनी बुरी ये बात गौर करने वाली है. तरक्की की इस अंधी दौड़ में आदमी सिर्फ पैसा कम रहा है . परिवार,सुख, और शांति की जगह तनाव ,क्रोध और हिंसक प्रवत्ति ने लेली है .

आज की पीढ़ी के बच्चे कड़ी प्रतियोगिता का सामना कर रहे हैं . हर दिन एक नयी चुनौती एक नयी शुरुआत और सर पर पढाई का बोझ . मगर पढाई करे बिना किसी का भला भी नहीं हो सकता इसीलिए वो तो जरुरी है.बच्चों के साथ साथ उनके माता पिता भी इसका हिस्सा बन जाते हैं . हर माँ बाप का सपना अपने बच्चे को सर्वश्रेष्ट स्थान पर देखना का है जो की एक अच्छा बात है और जिस सपनो को पूरा करना हर बच्चे का फ़र्ज़ है .मगर दुनिया का उसूल है की हर आदमी एक जैसा नहीं होता कही न कही सब में कुछ न कुछ कमी या अच्छाई होती है .

मेरे कहने का मतलब ये बिलकुल नहीं की तरक्की करना हर किसी के बस के बात नहीं . लेकिन हर आदमी एक शेत्र में तरक्की करे ऐसा नहीं हो सकता. सबका अपना अपना हुनर है . इसी तरह हर बच्चा अलग और उसका अपना हुनर होता है .लेकिन हर माँ बाप चाहते हैं उनका बेटा डोक्टर बने या जो वो चाहते हैं वो बने . मगर सवाल ये उठता है की क्या बच्चो से पूछे बिना उनके भविष्य का फैसला करना उनकी मर्ज़ी जाने बगैर ही उनकी फिएल्ड तय करना सही है ?

जैसा की मैंने पहले कहा की हर बच्चा एक सा नहीं होता और ये बात भी सही है की हर बच्चा पड़ने में अच्छा हो ये जरुरी नहीं है मगर ये बात सही है की हर बच्चे में कोई न कोई हुनर होता है कोई चित्रकारी में कोई खेल कूद में मगर आज कल सिर्फ
पढाई पर ज्यादा जोर दिया जाता है जो एक हद तक ही सही है . 

मगर कितना सही है सवाल ये है . माप बाप बच्चो के ज़रिये अपने सपने पूरे करने की इच्छा रखते हैं. समाज और माता पिता के दवाब में बच्चे डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं . बच्चो से कहा जाता है की "तुम्हे इस बार ९५ परसेंट मार्क्स लेन है , शर्मा जी के लड़के से अच्छा बनना है , डोक्टर बनकर हमारा इलाज करना है" और कोचिंग और स्कूल में टीचर की बातें इन सब में आकर बच्चे कोशिश तो करते हैं मगर कई बार सफल नहीं हो पते. और इस कारन कई बार प्रतारित किये जाते है और कई बार धुत्कारे भी . बच्चे गीली मिटटी की तरह है जिसको जरा सी हवा लगे तो मुड़ जाते हैं . माता पिता को बच्चो की नाकामयाबी पर उन्हें डाट ने की बजाए उन्हें समझाना चाहिए और बच्चो का भी फ़र्ज़ है की अपने माँ बाप का सपना पूरा करे . और अगर वो पड़ी में अच्छे न हो तो अपना हुनर अपनी अच्छे माता पिता के सामने रखे और उनसे बात करे . मगर ज्यादातर ऐसा नहीं होता नाकामयाबी और समाज में बदनामी की वजह से बच्चा जो रास्ता अपनाता है वो काफी खतरनाक है वो है मौत का रास्ता . जी हाँ मौत का रास्ता आज की पीड़ी के बच्चे दवाब में आकर आत्महत्या का फैसला लेते हैं जो की सरासर गलत है . मगर ये कुछ सवाल उठते हैं की ये कदम नादानी में उठाए हुए हैं ?, दवाब में उठाए हुए हैं ?, या फिर इसके जिम्मेदार माता पिता और शिक्षक है ? जवाब जो भी हो अगर आज ये बहुत बड़ी समस्या बन चुकी है भारत में ही नहीं बल्कि विश्व भर में साल में करीब १००००० लोग आत्महत्या करते हैं क्या ये जिसमे से आधी भारत में होती है और करीब ५००० बच्चे ही आत्महत्या करते हैं . मगर सबकी वजह पढाई नहीं है समाज में कई और वजह भी है जिसके कारन ये सभ हो रहा है. जी हाँ  रागिंग जैसे अन्य कारन भी है जिस कारन आजकल बच्चे आत्महत्या का कर रहे हैं .

आज माता पिता का ये फ़र्ज़ है की अपने बच्चों की ये समझाए की क्या सही और क्या गलत . उन्हें हर परिस्तिथि से लड़ना सिखाए और साथ ही ये जानने की कोशिश करें की उनके बालक ये बालिका किस चीज़ में ज्यादा दिलचस्पी लेते हैं ताकि ये और साथ ही कॉलेज और स्कूलों में भी ये सभ सिखाया जाये और उन्हें हर तरीके से बढावा दिया जाए मगर गलत रस्ते में नहीं अगर आपको लगता है की आपका बच्चा रस्ते से भटक रहा है या गलत रास्ते जा रहा है तो उसे समझाए और सही रस्ते पर चलने की शिक्षा दे . और जहाँ तक बात है पढाई तो उसमें उसकी मदद करें. उनको ज़िम्मेदार बनाए और समझदार भी और बच्चे अपने माँ बाप के प्यार का गलत फैदा न उठाए उनकी इज्ज़त करें और अपनी जिंदगी और पढाई से जुडी हर छोटी बड़ी बात पेरेंट्स से शेयर करें. और नमकम्याबी से सबक ले और आगे और अच्छा करने का प्राण ले और अगर आपको लगता है की आप किसी और शेत्र में अच्छे हैं तो उसके बारे में अपने माता पिता को बातें . क्यों की टलेंट का मतलब सिर्फ पड़ी में अच्छा होना नहीं होता टलेंट किसी भी फिएल्ड  में हो सकता है उसके बारे में अपने माता पिता को अवगत कराएं. ताकि वो आपको बता सके की आप आगे क्या करें .

कोई माता पिता अपने बच्चे का बुरा नहीं चाहता मगर अगर इस तरह की दुर्र-घटना हो रही है तो कही न कहीं कुछ तो गलत हो रहा है. इसीलिए माँ बाप बच्चों के दोस्त बने उनके हुनर को पहचाने उन्हें उनका नाम देकर ही बढावा दें दूसरों का एक्साम्प्ल देकर नहीं . परेशानी की जड़ तक जाना ही उसका हल नहीं उसका सुधर करना उसका हल है और शुरुआत खुद से करनी पड़ेगी बच्चो को भी और माता पिता को भी. ताकि ये समाज परेशानी कम हो सके और हम और तरक्की कर सके . क्यों की ये बच्चे ही आने वाले देश के नागरिक है ये सवास्थ रहेंगे तो कल सुरक्षित रहेगा.

बच्चे ध्यान रखे हैं की सतर्क रहे . अपने विवेक और बुद्धि से काम ले और जीवन की गहराई  कोई समझे. ये एक अमोल्या चीज़ है जिसका उपयोग अच्छे से करें हो आत्महत्या जैसे कुविचार आने से पहले अपने माता पिता के बारे में सोचे की उनके दिल पर क्या बीतेगी जभ वो आपका मृत शरीर देखेंगे . इसीलिए समय रहते जग जाइए. समझदार और सतर्क हो जाइये और ऐसे आत्महत्या और कई ऐसे बुरे काम करने से बचिए. क्यों की ज्ज़िन्दगी बहुत कुछ सिखाती है और बहुत रुलाती भी है मगर जो इन सभ का सामना डट कर करता है वो आगे चलकर सफल बनता है. हर चीज़ को मन लगाकर करिए और अच्छे से करने की कोशिश कीजिये , और प्रेशेर और डिप्रेशन से बचिए.
माता पिता के रूप में मिले भगवन को धोका न दें. क्युकी आपको भले ही माता पिता न देख पाए मगर ऊपर वाले की नज़र हमेशा आप पर बनी रहेगी. 

                        " Life is small,beautiful and li'll difficult dont leave it just live it" 
       "Life is a precious gift which is gifted by god and parents are you second god"
                                                                                                                     

                                                                                                                  - Aishwary Dubey
                                                                                                   Founder - (Blog)Lets Talk Staight